अमृतसर के कस्बा रमदास के गांव सुधार में आज शुक्रवार दोपहर को मरीज बनकर आए दो बदमाशों ने भंगू अस्पताल में घुस कर एक डॉक्टर पर फायरिंग कर दी। गोली लगने से डॉक्टर बुरी तरह से जख्मी हो गया। घायल डॉ. कुलविंदर सिंह का इलाज चल रहा है और हालत काफी गंभीर बताई जा रही है। सूचना मिलने पर एसएसपी देहाती मौके पर पहुंचे और जायजा लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। बदमाशों की पहचान के लिए पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाल रही है। जानकारी मुताबिक डॉ. कुलविंदर सिंह भंगू को पिछले काफी समय से फिरौती के लिए धमकियां मिल रही थीं। दो महीने पहले अस्पताल के बाहर हवाई फायरिंग भी की गई थी। इस संबंधी डॉक्टर की ओर से पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई थी। पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था और डॉक्टर की सुरक्षा के तहत एक गनमैन भी मुहैया करवाया गया। शुक्रवार को गनमैन छुट्टी पर था। शुक्रवार दोपहर को जब डॉ. कुलविंदर सिंह अपने अस्पताल में मौजूद थे तभी दो युवक आए और बुखार होने की बात कही। जब डॉक्टर कुलविंदर ने युवकों को जांच के लिए अपने कैबिन में बुलाया तो उनमें से एक ने पिस्तौल निकाला और...
एसडीएम घुमारवीं गौरव चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि सभी वाहन मालिक अपने मोबाइल नम्बर को वाहन सॉफ्टवेयर में अपडेट करना सुनिश्चित बनाएं। उन्होंने बताया कि वाहन सॉफ्टवेयर में मोबाइल नंबरों के अपडेट न होने के कारण चालान नोटिस समय पर संबंधित वाहन मालिकोें को नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसके कारण बड़ी संख्या में ई-चालान लंबित हैं, जिन पर कार्रवाई की गति अत्यंत धीमी है। उन्होंने बताया कि समय पर मोबाइल नंबर अपडेट नहीं किए जाते हैं तो वाहन मालिक न केवल ई-चालानों की सूचना से वंचित रह जाते हैं, बल्कि आगे चलकर ऑनलाइन टैक्स भुगतान, परमिट नवीनीकरण और अन्य परिवहन सेवाओं में भी कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए सभी वाहन मालिकों से अपील की है कि वह अपने निकटतम क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) या लाइसेंसिंग प्राधिकरण (आरएलए) कार्यालय में जाकर या ऑनलाइन माध्यम से अपने मोबाइल नंबर को तुरंत अपडेट करवाएं।
सदर बिलासपुर के विधायक त्रिलोक जमवाल ने प्रदेश में बेसहारा मवेशियों की बढ़ती तादाद और इससे हो रही समस्याओं पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा मवेशी आए दिन सड़क हादसों का कारण बन रहे हैं। इससे जहां कई लोग घायल हो जाते हैं, वहीं कइयों की जान भी चली जाती है। बेसहारा मवेशियों के मामले में भी यही स्थिति है। इस बात की तह तक जाना बेहद जरूरी है कि आखिर किसानों को अपने पशुधन को क्यों छोड़ना पड़ रहा है। अहम पहलू यह भी है कि प्रदेश के गौसदनों में 10-12 हजार मवेशियांे को रखने की व्यवस्था है, जबकि इनकी संख्या डेढ़ से दो लाख हो चुकी है। ऐसे में जंगलों में ओपन फेंसिंग के माध्यम से मवेशियों के लिए चारे-पानी की व्यवस्था करना इस समस्या के समाधान में कारगर साबित हो सकता है। विधानसभा में चर्चा में भाग लेते हुए त्रिलोक जमवाल ने कहा कि बेसहारा मवेशियों की समस्या के लिए पशु अस्पतालों में सुविधाओं की कमी एक बड़ा कारण है। किसान बड़ी उम्मीदों से मवेशी पालते हैं। दुधारू मवेशियांे को इंजेक्शन आदि लगवाने के लिए अस्पतालों में स्टाफ की कमी आड़े आ रही है। अक्सर चतुर्थ श्रेणी कर्मिय...
Comments
Post a Comment