आउटसोर्स कर्मियों के साथ किए जा रहे शोषण की निष्पक्षता के साथ हो जांच :-राजेश धर्माणी ।

घुमारवीं के विधायक राजेश धर्मानी ने सरकार से शिमला क्लीनवेज कंपनी द्वारा आउटसोर्स कर्मियों के साथ किए जा रहे शोषण की निष्पक्षता के साथ जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि कंपनी द्वारा आउट सोर्स पर रखे गए कर्मचारियों के प्रति सकारात्मक रवैया न अपनाते हुए उत्पीड़न की नीति अपनाई जा रही है जिससे कर्मचारियों रोष है। कहां की इस परेशानी की वजह है कर्मचारियों को मानसिक, शारीरिक व  आर्थिक प्रताड़नाओं का सामना करना पड़ रहा है। 
इस संबंध में आज आउट सोर्स कर्मियों का एक प्रतिनिधिमंडल विधायक से मिला और शिमला क्लीनवेज कंपनी द्वारा की जा रही कार्रवाईयों के प्रति जानकारी दी व जांच की मांग की।
विधायक ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि इस संबंध में सरकार के ध्यान में लाकर गहन जांच की जाएगी और जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा। कहा कि प्रदेश के सब वर्गों के अधिकारों के संरक्षण व सुरक्षा के प्रति प्रदेश सरकार संवेदनशील है जिसके लिए किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।सरकार शिमला क्लीनवेज कंपनी की गड़बड़ियों की जांच करेगी. क्लीनवेज कंपनी को पिछली सरकार के समय में 40 करोड़ रुपए दिए गए. उन्होंने कहा कि इस कंपनी के माध्यम से जो गड़बड़ी हुई, सरकार उसकी जांच कर यह देखेगी कि किस तरह गलत तरीके से काम किया गया. वहीं, कितने पैसे इस कंपनी को दिए गए. यह भी जांचा जाएगा कि कितने कर्मचारियों का पीएफ काटा गया और कितनों का नहीं काटा गया. उन्होंने कहा कि इस कंपनी ने एंप्लॉयमेंट एक्सचेंज की तरह काम किया है, जिनको नौकरियां मिलनी थी उनका हक मारा गया.
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विधायक बोले, इतनी चिंता थी तो भाजपा के समय आउटसोर्स कर्मचारियों पॉलिसी क्यों नहीं बनाई अब यह अपनी गलतियों को हम पर मढऩा चाह रहे हैं। अगर आउटसोर्स कर्मचारियों की इतनी ही चिंता थी,  पॉलिसी क्यों नहीं बनाई? जब सरकार के जाने का समय हो गया, तो सिर्फ एक कैबिनेट सब कमेटी बनाई गई। वर्तमान सरकार ने किसी आउटसोर्स कर्मचारी को निकालने के आर्डर नहीं दिए हैं।

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